हाथ रखना
वो प्रेम करती है तुम्हे, उसे सदा अपने साथ रखना, उदास दिखे कभी तो, होले से हाथ पे हाथ रखना। उसके दुःख मे उसके लोगो के बंध जाए हाथ अगर, उसके लिए तुम खुले दोनों हाथ रखना। यू तो वो मुसीबत मे कमजोर नही पड़ती है पर, दिखे आँसु कभी तो आँखों पर अपने हाथ रखना। वो तन्हा न महसूस करे खुद को भीड़ मे भी, निडर रहेगी भी तुम उसके साथ रहना। कहती रही बार बार यही बात मुझसे वो, मेरी मांग पर सिंदूर लिए तुम ही अपना हाथ रखना। ये हवाएं भी कोशिश मे है तेरी उम्मीद बुझाने को, प्रिय तु भी दिये के चारो तरह जमाये अपने हाथ रखना।
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