रख स्वयं पर विश्वास
रख स्वयं पर विश्वास, मत रख किसी से कोई आस, ज़रूरी नहीं कि आए तू हर किसी को रास, क्योंकि नहीं है तू हर शख्स के लिए खास। जो तेरा अपना है वो तुझे डूबने नहीं देगा, और जो पराया है वो तुझे एक बार निकाल जरूर देगा, तेरा विश्वास भी जीत लेगा, और फिर तुझे डूबने को मजबूर करेगा, तुझ पर हँस कर महानता की सुर्खियां भी बटोर लेगा। इसलिए जो चोट खाई हैं उनसे कुछ सीख ले, बंद कमरे में ही चीख ले, लेकिन बाहर मंद -मंद मुस्कुराहट के साथ जीना सीख ले। मत बांध खुद को समाज की इन बेड़ियों से, दूर रख खुद को इन खोखली सोच के भेड़ियों से। मत बना खुद को किसी और की सोच का गुलाम, नई सोच कर विकसित लगा उनकी सोच पर विराम। ये भेड़िए तेरे साथ हमेशा रहेंगे, तेरे सुख को नहीं सहेंगे, और तेरे दुःख को और बढ़ा देंगे। इसलिए तुझे इनके बीच ही रहना है, पर कुछ नहीं सहना है, और भावनाओं में नहीं बहना है, कभी बल से तो कभी बुद्धि से काम लेना है। रख खुद पर विश्वास, मत रख किसी से कोई आस। ना बन तू इन भेड़ियों जैसा, और ना कर जैसे तो तैसा, बस करते जा वैसा, कहते हैं श्रीकृष्ण जैसा। तेरे समक्ष किसी ना किसी रूप कृष्ण भी आएंगे और दुर्योधन जैसे भी आएंगे, पर कब तुझे अर्जुन बनना है और कब कर्ण ये तुझे तेरे सत्कर्म ही समझा पाएंगे। मत बन तू इस समाज की सोच का रोगी, देर ज़रूर होगी, पर जीत अवश्य तेरी ही होगी। रख स्वयं पर विश्वास, मत रख किसी से कोई आस। रख स्वयं पर विश्वास।
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