🫡
नफरत है मुझे इन जुबानी हमदर्दियों से, तेरे हाथ में खंजर है तो गर्दन पे रख, मेरे दोनों हाथ जेबों में देखकर निठल्ला ना समझ, मेरी जेब में रखी लाल कलम पर तू निगाहें रख। मेरी बुराई की अफवाहों को तू खूब उड़ा महफ़िलों में, जरा अपने कारनामों की गठरी को तो संभाल के रख। मुझे ठहरा हुआ देख इतना मत इतरा ओ नादान, नासमझ मेरे पैरों के छालों को नज़र में रख। 🫡
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