निस्वार्थ प्रेम
इक प्रेम निस्वार्थ सा उस बादल सा जो जमीन पर बरसता है उस सूरजमुखी सा जो सूरज की ओर आकर्षित होती है उस दिन सा जो शाम के लिए ढलता है उस माँ की तरह जो दिन भर फिक्र करती है उस प्रेम की अभिलाषा लिये मेरा मन तुम्हारे आधीन है
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