कांवरिया
मैं पढ़ा लिखा हूं इसीलिए अंधविश्वास में मैं अपनी महान संस्कृति को अंधविश्वास नहीं कह सकता मैंने महसूस किया है अध्यात्म के विज्ञान को मैंने महसूस किया है अपने परंपराओं के प्रभाव को। मुझे गर्व है कि मैं कांवरिया हूं मैं समरसता का वाहक हूं ऊंच -नीच, जात- पात को त्याज्य मैं सर्वस्व अर्पण करने को उतारू हूं। एक उद्देश्य के लिए हमने एक साथ संकल्प लिया एक राह पर एक मंजिल के लिए एक साथ हम सभी ने तन को तपाया । शारीरिक श्रम और मानसिक मजबूती का हमने एक साथ अभ्यास किया है जो संकल्प लिया उसे सिद्ध करने को अपनी क्षमताओं से भी अधिक प्रयास किया है। विकल्प नहीं वापस लौटने का संकल्प ले लिया तो ले लिया अब सिद्धि के लिए जान भी जाए तो उसके लिए मन को तैयार किया है। मैं भी शिव हूं सहयात्री भी शिव हैं एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन एक- दूसरे को हमने बोल बम कह प्रणाम किया है।
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