"अधूरी वफ़ा का आखिरी मंज़र"
जब मेरा जनाज़ा निकलेगा तो उसे गली में बुला लेना, हो सके तो उसे मेरी आख़िरी झलक दिखा देना। वो जो कहती थी कि मेरे बिना साँस नहीं ले पाएगी, उसे मेरी रुकी हुई साँसों का मंज़र दिखा देना। देखना वो रोएगी नहीं, बस चुपचाप खड़ी होगी, शायद अपनी किसी नई मोहब्बत की बाँहों में जुड़ी होगी। उसके कानों में बस इतना कह देना जाते-जाते, कि जिसे तुमने ठुकराया था, आज वो मिट्टी में सो रहा है। मेरी बंद आँखों से जो एक आँसू छलक जाए, तो समझ लेना कि रूह भी जाने से कतरा रही है। मिटा देना मेरा वजूद उसके शहर की गलियों से, क्योंकि मेरी मौत भी अब उसे शर्मिंदा कर रही है। कफ़न हटाकर मेरा चेहरा उसे मत दिखाना, कहीं मेरी बेबसी देखकर उसे ख़ुद से नफ़रत न हो जाए। मैंने मरकर भी उसकी ख़ुशी का ही ख्याल रखा है, ताकि मेरी लाश को देखकर , उसकी मुस्कुराहट न खो जाए।
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