जख्म
आंखों के किनारे आकर आंसुओ की बरसात रूकी है होठों पर आकर दिल मे छुपी बात रूकी है सहते सहते मर जाएं हम उससे पहले जी लेने दो पर्वत से कठोर होने से पहले नदी बनकर बह जाने दो
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