'तभी तो आप मेरे सनम है'
ओढ़ कर अपनी शर्म की घूँघट बिंदिया माथे पर लगा कर सजा के चूड़ियों से कलाई को हाँथ मेहंदी से रचा कर एक दिन आप आयी मेरे जिंदगी में और रंग दी इस दिल को अपने ही मोहब्बत भरी रंगो से फूलो से प्यारी है आप सनम कलियों से भी आप न्यारी है ऐ चाँद पता है आप को तभी तो आप मेरे सनम है ! मेरे दिल की वो सारी बातें आप जान लेती है अपने दिल से अगर इस दिल में छुपा हो दर्द कोई तो उसकी भी आप को सनम खबर लग जाती है ग़म में रह कर मुस्कुराते रहना मैंने आप से सीखा है आप मेरे जिंदगी और होठों की मुस्कान है ऐ चाँद बोलिये ना पता है आप को तभी तो आप मेरे सनम है ! हिरणी के जैसी है आँखे आप की और कोयल के जैसी आवाज आप का ये चाँद के जैसा मुखड़ा उस पर फूलो सा मुस्कान जीत लेती है सनम अक्सर मेरे दिल को सुन कर खनक आप की रंग बिरंगी उन काँच की चूड़ियों के आप की तरफ़ खुद ही सनम खींचे चले आते है ऐसा लगता है की जैसे वो चूड़ियाँ मुझें पुकार रही है आप का साथ उम्र भर कभी छोड़ेंगे नहीं ऐ चाँद पता है आप को तभी तो वर्षो से आप मेरे सनम है ! _ कृष्णा कुमार यादव 'सागर'
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