हे सखी तू बस दिल साफ रख
हे सखी तू बस दिल साफ रख चल रहे जो षड्यंत्र , कर रहे जो कुनीति दिल से उनको माफ कर हे सखी तू बस दिल साफ रख करते हैं जो अनीति उन पर न तु ध्यान धर सौंप कर सब श्री चरण में प्रभु से विनती बार-बार कर हे सखी तू बस दिल साफ रख तू चल अपनी राह पर लक्ष्य को तू प्राप्त कर राह में आए यह कांटे चुन चुन कर तू साफ कर हे सखी तू बस दिल साफ रख तू कर अपना कर्म औरों के कर्म को नजर अंदाज कर कुकर्मी का होगा न्याय ईश्वर के द्वार पर हे सखी तू बस दिल साफ रख
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
