टूटे दिल की तन्हा मुस्कान
नहीं आया हमको उसकी याद ना करनी है उसकी फरियाद हम भले ही करे उसका इंतजार क्या हो पाएगी फिर से एतबार? जब दिल टूटता है कई बार उन टुकड़ों को जोड़ना भी लगती हैं बेकार दिमाग में आए सवालों के बीच मुस्कुरा लेते हैं खुदको हर शाम टूटते तारों के संग रुला लेते हैं खुदको जिंदगी हैं, चलती रहेगी भले ही कुछ पलों के लिए भटक क्यों न जाए हम.. अकेलापन हमेशा साथ देगी भले ही किसी मोह माया में अटक क्यों न जाए हम।।
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