अधूरे ख्वाब सा हूं मैं
अधूरे ख्वाब सा हूं ना जाने कहां हूं हां है एक दुर्लभ दास्तां मैं और मेरी यादें जीवन की इस यात्रा में मिला है एक शख्स जो है मेरे तरह अधूरे से ख्वाब और सपने लेकर जीवन की इस यात्रा में शामिल हैं पता नहीं कब तक चलेगी ये दौर मैं तो खुद अधूरा हूं और इस जीवन की सफर में वह भी है शामिल हां मै क्या बताऊं उसकी मुस्कान, और आंखे पल पल याद आती है हां है एक अजनबी जो मुझसे बाते करती है , ख्याल रखती है , बात बात पर गुस्सा होती है पर प्रेम भी करती है मुझे नहीं मालूम ये सपने है या हकीकत लेकिन फिर भी । मै चल पड़ा हूं समय के मार्ग पर समय जिधर जाए मै उधर जाऊ इस यात्रा में वह साथ रहे या ना रहे मै सदा उनके साथ हूं हां है कोई एक अजनबी जो मुझसे दूर लेकिन है मेरे हृदय में ❤️ मनोज सोरेन ✍️✍️✍️ Jharkhand dumka Email-manojsoren5290
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