!! मै निकला हू घर से !!
मै निकला हू घर से कुछ पाने की चाहत ले कर । मै लड रहा हूं खुद से अपने सपनो की खातीर || ना सुबह का सुरजा का पता, ना रात का चाँद नही मालूम है मुझे सुरज की रोशनी नाही अंधेरी रात ! बस मुझे मालूम है, मेरे मंजिल का ठीकाना ! मै निकला हू घर से कुछ पाने की चाहत ले कर । मै लड रहा हूं खुद से अपने सपनो की खातीर ।I मै खुद में इतना खोया हुआ हूँ! ताकि खुद मे खुद को खोज सकु ! अभी मैं मौन हु, खामौस हूं ताकि खुद को जान सुकु पहचान सकु, कौन हूँ और क्यू आया हूँ! मै निकला हू घर से कुछ पाने की चाहत ले कर । मै लड रहा हूं खुद से अपने सपनो की खातीर || मै कर रहा हूँ हर रोज खुद से एक वादा, वक्त जा चुका है आधा , मंजील तक जाना है अभी, वक्त ना थमा था ना थमेगा कभी कर सके मुकाबला तो कर ले लड सके तो लडले ! मै निकला हू घर से कुछ पाने की चाहत ले कर । मै लड रहा हूं खुद से अपने सपनो की खातीर ||
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