कमी
शाम से आँख मे नमी सी है, आज फिर आपकी कमी सी है। दफन कर दो हमे की साँस मिले, नब्ज कुछ देर से थमी सी है। वक्त रहता नही कही छुपकर, इसकी आदत भी आदमी सी है, कोई रिश्ता नही रहा फिर भी, एक तसल्ली लाजमी सी है।
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