तरस
जिसे प्यार की कदर नहीं, उसपे प्यार बरस रहा है, जिसे प्यार की कदर है, वो एक बूंद के लिए तरस रहा है। ये दुनिया बड़ी बेईमान है, ख़ुश यहाँ सिर्फ़ शैतान है, अच्छाई हुई बर्बाद यहाँ, दिखावा यहाँ आबाद है। प्यार के यहां भूखे सब, जब मिले तो उसपे थूके सब, आशिकों को अंदेखा करके, नालायकों की तरफ देखे सब, नालायक ने जब दिल तोड़ा, तो पूरा कौम बन गया दोषी अब। दुख तो मिलेगा ही इतना मोटा, जब तुम चुनोगे सिक्का खोटा, तुम प्यार कहीं बर्बाद कर गए, कहीं और रह गया आशिक सोता। ये जहान हो गया बर्बाद है, हर जगह यही दरस रहा है, जिसे प्यार की कदर नहीं, उसपे प्यार बरस रहा है, जिसे प्यार की कदर है, वो एक बूंद के लिए तरस रहा है।
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