बड़े बापू का साया !
भटकते हुए छोड़ा था..! आज भी भटक रहा हूँ..! जब नन्हे पाव मेरे लड़खड़ाते थे..! हाथ अपना मेरे हाथों में पकड़ाते थे..! चलो बेटा कहकर खिल-खिलाते थे..! पावों की लड़खडाट तो मिटा गए बापू..! पर जिंदगी की बीच राहों में हाथ अपना छुड़ा गए बापू..! मेरी सरारतों में धीरे से आँख दिखाते थे बापू..! देख आँसू मेरे हँसकर पीठ सहलाते थे बापू..! बचपन बीत गया बचपना भी चला गया बापू..! किन्तु बिन तेरे जीवन मेरा बिखर गया बापू..! बापू ये दुनिया बड़ी मतलबी है..! आपकी तरह सहलाती नहीं..! आपकी तरह हंसाती नहीं..! बापू हाथ तेरा मुझको प्यारा था..! मेरी लड़खड़ाती जिंदगी का तुही तो सहारा था..! बापू अंगुली तेरी छूट गयी..! बापू बिन तेरे जिंदगी मेरी रूठ गयी..! -रावल
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