नाजुक कली
उड़ चली है नन्ही तितली सारी जंजीरें तोड़ समाज के नियमों के दूसरे पार; दुनिया का भोज कंधों पर कायम रख अपनी खुशियों का रास्ता ढूंढ लिया एक अदभुत सुनहरे फूल के शहद में शुद्ध डुबकी लगाके।
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