पथ से भटकाया है
मीठी बातों से बहलाया है, पथ से अक्सर ही भटकाया है । बहकावे में ले लेते दिलबर, मन को हमने तो समझाया है । खुद ही खुद से खुद को मारा, दुनिया ने हम को भड़काया है । गम के साये में जीते हम तो, खुशियों का छत दिलवाया है । जीवन मे ऐसे अवसर आये, दुश्कर प्रश्नो को सुलझाया है । मनसीरत सांसें जीने की कम, रास्ता आगे का दिखलाया है ।
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