पेड़ - अस्तित्व का आधार
स्वार्थी मानव ! अपने फायदे के लिए कर रहा है प्रकृति का नुकसान , अक्ल पर उनके पत्थर पड़ गए जिससे बढ़ रहा प्रकृति का तापमान । कूलर का खर्च, पानी की खपत से उनको राहत मिलती , बिजली का अधिक बिल उनको अच्छा लगती। अरे मूर्ख इंसान ,मुफ्त के वृक्ष और एक मग पानी हर रोज देता तू , तो आज तुझे न गर्मी लगती ,न ही कूलर व एसी की जरूरत पड़ती। लाखों का घर बनाएंगे ,लेकिन लाख पेड़ नहीं लगाते एसी कार लेते हैं, लेकिन एक पौधा नहीं खरीदते । करोड़ों लोग मिलकर प्रदूषण फैला सकते , करोड़ों लोग मिलकर पेड़ नहीं लगा सकते। क्या इस प्रकृति के प्रति हमारा कोई फर्ज नहीं सारे जिम्मेदारी सरकार की है? जब जनता सरकार बदल सकती है तो प्रकृति को क्यों वापस हरा भरा नहीं बना सकते। अब तो जागरुक होकर कर पहल अपनी सोच बदल, तभी बन पाएगा बेहतर कल।
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