वो
चली है वो एक मकां को घर बनाने आंसुओं से अपनी चली है उसे सजाने कोई है नहीं वहां उसे अपना कहनेवाला आग पर रख पांव चली है रिश्ते निभाने नहीं सोचती अब बिल्कुल अपने बारे में ख़ुशियों को अपनी चली है वो दफ़नाने है तैयार पूरी ज़िंदगी काटने को ऐसे ही बेरंग जीवन को चली है बेमन अपनाने मासूम है, भोली है, नाज़ुक है अंदर से बनकर साहसी चली है सबको चौंकाने ख़ुद के अस्तित्व को मिटा दिया है उसने भूल दुःख अपने चली है अपनों को हंसाने कहां हर किसी को दे पाया है कोई सबकुछ पगली है वो चली है रूह को दाव पे लगाने चली है वो एक मकां को घर बनाने आंसुओं से अपनी चली है उसे सजाने
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