*दिल चाहता है*
✍️ ईश्वर ढकाल कभी दिल चाहता है आईना बनूँ मैं तेरा, मुझे ही देख, खुद को सँवारे तू… खुद को निहारे तू, और हर बार अपने चेहरे पर मेरे होने की झलक पाए तू। कभी दिल चाहता है हवा बन जाऊँ, तेरी ज़ुल्फ़ों को छूकर तेरे दिल तक उतर जाऊँ, बिना आवाज़ के, बस एहसास की तरह रह जाऊँ। कभी दिल चाहता है परछाई बनूँ तेरी, तू जहाँ जाए मैं तेरे कदमों की धुन में खामोशी से चलता जाऊँ। कभी दिल चाहता है तेरी मुस्कान का सबब बनूँ, तेरी आँखों की चमक बनूँ, तेरी धड़कनों की लय में धीरे-धीरे खोता रहूँ। और कभी दिल चाहता है तू बस एक पल को रुककर मेरे होने को महसूस करे— जैसे तेरे हर साँस में मेरा नाम छुपा बैठा हो। तू चाहे न कहे, पर मैं फिर भी तेरा रहूँ— क्योंकि मोहब्बत का रिश्ता ज़ुबान नहीं, दिल पूछता है।
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