हमसफर
वो उतरा सपनों के जहा से मेरा हाथ थामकर खुशियों की मंजिल तक पहुंचने। मेरे आंसू समेटकर उनसे हसी का काढ़ा बना पिलाया। जगा दिया उसने मेरा खोया हुआ जज्बा मुझे पूरी तरह आजमाके, अब शीशे में सूनापन नहीं मेरे आत्मविश्वास के पीछे खड़ी उसकी परछाई झलकती है।
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