रेस
रेस ***************************** पहले संस्कारो की रेस मे , हम, बाजी मारकरही भौतिक दीखावे की रेस , मैदान रेस का, पुरा की पुरा मारने उतरते है। नया खिलाडी क्या जाने रेस के नियम, वे तो हारने वाले घोडे को, और जखमी घोडे को, बंदुक की गोली से सिर्फ, ऊडानाही जानते है। लेकीन हम संस्कारोमे पले बढे लोग, थोडा हटके सोचते है। हम रेस के लंगडे घोडों को , गोली नही बडे प्यार समजाते है, बेटा ये जींदगी की रेस है, जो तुम्हे हरना नही। जखम पे महरम लगाकर, हारहाल मे जीतनी है, ताकी सामने वाला, दोबारा कभी । तुम्हारे साथ रेस लगाने से पहेले ही, ऊसके ईरादे पस्त हो जाये, ऊसके ईरादे पस्त हो जाये। *******************************
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