मेरी मुहब्बत
वो राहों में हंसते हुए चलते हैं हवा में उनके रेशमी बाल लहरने लगे। जब उन्हें शौक है संवर के रहने का , हम भी उनकी अदाओं पे मरने लगे। वो रातों को सपनों में आने लगे, दिन में हम उन्हें याद करने लगे। हमनें तो यूं ही कह दिया खूबसूरत उन्हें, वो गुरूर करने लगे। हमसे हो गए दूर , हमें अपनी नज़रों से दूर करने लगे। फकत यही थी मुहब्बत हमारी ,की वो भूल गए, और हमे भूलने के लिए मजबूर करने लगे।
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