जलहरण घनाक्षरी छंद
(8,8,8,8 कुल 32 वर्ण, चार चरण, चरणान्त लघु लघु) रोज प्राणायाम करें, जरूर व्यायाम करें। ऊषाकाल घूमें फिरें, ताकि खुश रहे मन ।। करें प्रतिदिन योग, रखें बदन निरोग। शुद्ध जल अन्न फल, नियमित हो सेवन।। हर दम श्रम करें, चिंता तंद्रा कम करें। रहें सक्रिय अपने, ताकि दृढ़ रहे तन।। संयम नियम रखें, सोच को उत्तम रखें। सदा सही राह चलें, करें कुवृत्ति दमन।। नरेंद्र सिंह, अतरी, गया
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