अनंत काल
जिन गलियों को पीछे छोड़ बसा ली थी हमने अपनी एक सुनहरी दुनिया मुलाकात हुई उनसे कल फिर एक बार। दिल मंद मंद मुस्कुराकर अपने ही धुन में गुनगुना उठा कि जीवन में फूल खिले है पर बिन काटो के।
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