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कभी था संचार का साधन अब होता हैं नृत्य यहां, जिसे देख शर्म आ जाए ऐसे होते हैं कृत्य यहां.. क्या बच्चे का क्या युवा बुजुर्ग सभी नाचते गाते है, अर्ध नग्न हो प्रसारित करते तनिक नहीं शर्माते हैं.. यदि बनाना रील तुम्हे तो सार्थक रील बनाओ ना, संस्कार और संस्कृति के रक्षक बन दिखलाओ ना.. थोड़ा सोचो क्या होगा परिणाम इन कारनामों का, थोड़ा सोचो भविष्य अपने आने वाले संतानों का.. ऐसे चलता रहा यदि तो हाथ धोना संस्कारों से, अश्लीलता की बू आएगी हर घर परिवारों से.. समय रहते इन हरकतों पर कोई तो रोक लगाओ ना, मिट जाएगा संस्कार कोई तो इसे बचाओ ना.. यदि ना होता पहल सार्थक बढ़ेंगे इसके दुष्परिणाम, मर्यादा,इज्जत,सभ्यता सबके होंगे काम तमाम..।
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