शोर कैसी मन में
शोर कैसे मेरे दिल में, क्या चल रहा विज्ञान की करामात धड़कती धड़कन मिनट ७२ बार पूछा जब मन से अपने, कर ध्यान योग यह पाया हूं, बोले यूं कुछ तो नही तेरी आदतें नही औरों की सुनने की, बोलता रहता हरदम रह शांत एक पल भी आत्म फरमाइश भी सुन ले चाहते तेरी और कुछ, पर रास्ते कहीं और कुछ, यूं रखता सवारता तुझे जिन्दगी पड़े कब इस जिम्मेदारी की जाल में, जन्म से ख्वाइश सबकी लगा बडा होने का डर पर कहा इतना गुम हो गए, सोच में न आए वो दिन न दिन सोची न वो रात न सुनी दिल की करते गए कर्म जात सोचा न क्या होगा फिर अनन्त न सोचे पहले आप
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