परब्रह्म
शिव ही नारायण , नारायण ही शिव है शिव ही नारायण , नारायण ही शिव है ।। धृ ।। कुछ भिन्न नहीं सब परब्रह्म का अंश है सब परब्रह्म का भाग है.... कुछ भिन्न नहीं सब परब्रह्म है || १ || ।। धृ ।। यह धरती , सूर्यमाला , आकाश गंगा , आकाश.... यह ब्रह्माण्ड , निराकार , निर्गुण , ओमकार स्वरुप.... परब्रह्म है , परब्रह्म है , || 2 || ।। धृ ।। बैठी माया मन से लिपटी , जैसे पन्नग लिपटे चंदन से । जो उसे भेदकर आए वो एक स्वरूप हो जाए परब्रह्म से एक स्वरूप हो जाए || ३ || ।। धृ ।। कुछ भिन्न नहीं सब परब्रह्म है , परब्रह्म है , परब्रह्म है ।। --- शिवप्रिया (पियु)
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