स्तोत्र -: श्री विष्णु जी
🌿 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🌿 नारद जानेउ नाम प्रतापू । जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू ॥ नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू । भगत सिरोमनि भे प्रहलादू ॥ भावार्थ:- नारद जी ने नाम के प्रताप को जाना है, " हरि " यानि विष्णु भगवान सारे संसार को प्यारे हैं, विष्णु भगवान को " हर " यानि महादेव जी प्यारे हैं लेकिन नारद जी तो विष्णु भगवान और महादेव जी दोनों के ही प्रिय हैं । नाम के जपने से ही भगवान ने प्रहलाद पर कृपा की जो प्रभु के भक्तों के भी शिरोमणि बन गये ।
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