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🙏मेरे शिव🙏 ✍झुमा दत्ता हे शिव शम्भू , हे त्रिपुरारी आनपरी तेरी चरण दुयारी। दुःख में तुझको चाहा मैं ने सुख आए तो भूल गई। मैं जो भूली , तुम न भूलें दरश दिए सपनों में मेरे। हाथ में त्रिशूल, त्रिपुंड्र ललाट, और भष्म की चादर तन पर उड़ें। रूप तुम्हारे देखें दो नैना छलक उठे आँखों की गंगा। आँख खुली और मन में बसें तुम, टुटी सारी मन की चमक, भ्रम। मेरे पिता तुम, मेरे गुरु तुम मेरे मन की आश तुम ही तुम। तुम मेरे लक्ष्य, भक्ति मेरी नईया, पार लगाओ हे भोले पार लगवईया। 🙏हर हर महादेव 🙏 न चाहूं स्वर्ग मैं,न चाहूं मोक्ष मैं तो चाहूं सिर्फ तेरी भक्ति की भावपक्ष।
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