खोज
वैसे ये मेरा गुमान नही पर,सच भी यही है शायद मैं नींद में हमेशा विजय रहा हूं कविताओं और कल्पना का जहान न सही अनुभव की एक बाल्टी तो है हर रोज़ एक लोटा अनुभव तुम भर देती हो उसमें अपनी किसी आदत या अपनी स्वभावगत विशेषता से और तब मुझे अनुभव होता है कितनी बेचैनी है अंदर मेरे कही गहरी छिपी हुई क्रोध,भय,आलस्य और झूठी महानता की टिका टिप्पणी हमेशा रहती है वहीं कही एक तीव्र गति की ट्रेन मन में दौड़ती है और यत्न रहता है यही कि सभी की रफ्तार उस जैसी हो फिर लगता है पटरी की आवाज हो रही है लेकिन जो सुनाई पड़ती है वो है, अंतर की बैचेनी साथ ही गुमान भी जो स्वीकार नहीं करने देता मैं भी तो साधारण हूं सभी की तरह विशेष नहीं कुछ किसी ने कहा स्वयं पर विश्वास सफलता है,परन्तु स्वयं की खोज फिर क्या है सब कुछ पाने की आशा और जीवन में अनंत शांति दो विपरीत दिशाओं की चर्चा सी बात बहुत सोचना और विचलित होना,ये तो आए दिन की क्रीड़ा है, जिसमें मैं विजय पा लेता हूं सब पर लेकिन,मगर,किन्तु वो बाल्टी मुझे दिखाती है अनुभव में मेरी ही परछाई जो है खामोश और विचलित
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