करतुत
करतुत ***************************** हर करतुत आपनी साफ रख्खो, भरो दम खुद मे ईतना, जो दुसरोके काम ऑ शके, औरौ को खुषी देके, मौज मनावो मणकी. नजर का भेद हटावो देखो आपने आप को, क्यु दुसरो पे जलकर, खाक करते हो, खुदीको. यारो देश आपणा है, मणावो दिवाली मीलके, कुछ फुलझडीया, कुछ आनार ऊडावो, मील जुल के दिवाली मणावो. क्या सख्खा है जीवन मे...., थोडासा सच्चाई से वाखीप तो हो, दिवाली है यारो..., थोडा सा खुलकर हस तो दो, थोडासा खुलकर हस तो दो ==============
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
