बेशक
मेरी हर कच्ची बातों पर 'बेशक ' तुम्हारा कहते रहना तुम्हारी हर बातों पर मेरा तुम सच्चे हो तुमसे कहना हाँ मैंने माना है कि ये बात थोड़ी अनजानी है पर सुनो ना ये भी सच है हमारी अलग कहानी है तुम वो हो जो मेरी बात को अपनी बात समझते हो तुम वो हो जो मेरे मन के सब ज़ज्बात समझते हो मैं भी शायद कभी कभी तुम्हारी उलझन सुलझाती हूं हाँ लेकिन ये भी सच है मैं खुद भी बहुत बताती हूं तुम्हारे लिए कुछ लिखूं मगर वो शब्द कहॉं से पाऊँगी बहुत बड़ी है बात तुम्हें फुर्सत में कभी बताऊँगी तुम्हें पता है तुम्हारी बातेँ कितना सबक सिखाती हैं तुम्हारी आंखे तुम्हारे मन के सारे भाव बताती हैं कभी तुम अगर पढ़ पाना तो मन की बात समझ लेना कभी अगर जो शब्द नहीं तो आँखों से बस कह देना देखो मेरी हर नादानी ऐसे ही तुम सहते रहना मेरी हर कच्ची बातों पर बेशक तुम्हारा कहते रहना सुनो मेरी जरा इक बात मेरी जैसे हो तुम वैसे रहना!
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