आखिरी मुलाकात
अधूरी बात थी, था आधा रास्ता तब उसको रोका मैंने देकर अपना वास्ता जो ख्वाब दिखाए थे वो आधे रह गए सुनो अभी बाकी कुछ वादे रह गए तुम अपनी बात रखो इल्ज़ाम लगाओ मेरी भी कुछ सुनो कुछ अपनी सुनाओ वो भी था सहमा सा कुछ टूटा सा अंदर रोका था उसने जाने कैसे गम का समंदर वो रोके मुस्कुराया मुस्करा के चल दिया मुझको को था गिला मगर दिल पिघल गया ना कोई था गिला ना अब कोई शिकायत वो भी था परेशान मैं कैसे करता बगावत कुछ इस तरह थी हमारी मुलाकात आखिरी बड़ी खामोशी से हुयी घंटों हमारी बात आखिरी
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