आध्यात्मिक जीवन
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को आध्यात्मिक जीवन जीने हेतु अनेक उपदेश दिए हैं। उनमें से तीन मुख्य बातें निम्न हैं: *1. निष्काम कर्म (स्वार्थरहित कर्म करना)*: "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।* मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ (2.47) अर्थात: कर्म करो, लेकिन फल की इच्छा मत रखो। *2. आत्म-ज्ञान और समत्व (सुख-दुख में सम भाव)*: "समदु:खसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥" (2.15) अर्थात: सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय में सम रहने वाला व्यक्ति ही स्थिरबुद्धि होता है। *3. भक्ति योग (ईश्वर में पूर्ण समर्पण)*: "मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥" (18.65) अर्थात: भगवान में एकाग्र भक्ति और समर्पण का मार्ग मोक्ष का मार्ग है।
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