मां
मां से बढ़कर संसार नहीं , मां सम कोई आधार नहीं। मां जीवन की एक ज्योती है, मां मालाओं की मोती है। मां तन , मन है मां जीवन है, मां अंतर्मन और अन, धन है। मां त्याग तपस्या की मूरत, मां ममता की भोली सूरत। बिन मां के जीवन है मुश्किल, बढ़ पाना एक पग भी है मुश्किल। मां गुरू ज्ञान और गीता है, मां से बढ़ कोई न है ज्ञानी, महिमा खुद ईश्वर ने है बखानी। मां से सृष्टि का निर्माण,मां से जीवन का कल्याण। बिन मां के कोई संसार नहीं,बिन मां के जग उजियार नहीं । सूरज की तपती गर्मी में मां ममता का एक आंचल है। जीवन की कटीली राहों में मां ममतारूपी मखमल है। मां से बढ़कर संसार नहीं, मां सम कोई आधार नहीं।।
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