शिवरात्रि
देखा है मैंने कल उत्सव का असर शेखर शादी थी शिव की और जोरदार व्यापार हुआ घास -पात जल- दुग्ध ही चौराहों पर खूब बिके गरीबों को रोजगार मिला और सबके पेट भरे। उस छोटी लड़की से पूछो न जो कल ही मंदिर किनारे फटे बोरे पर मदार बेचती थी पूछो की शिव पर जल चढ़ाने से क्या होता है उसकी आवाज होगी पैसा मिलता है घर चलता है । शिव का संबंध अंधविश्वास से नहीं अर्थव्यवस्था से है कोई गणना कर बताए कल कितने का व्यापार हुआ बेमोल की चीजें बेच कर कितना देश को लाभ हुआ कितनों को रोजगार मिला लक्ष्मी का विस्तार हुआ । बेकार समझी जाने वाली वनस्पतियों को भाव मिला उनको भी उपयोगी होने का अह्सास , संरक्षण मिला उन सपेरों से पूछो जो सर्प को बचाते और जिलाते है पारिस्थितिक तंत्र को मजबूती का अह्सास हुआ। शिवरात्री समरसता की रात्री सौहार्द की रात्री उनकी शादी में बस भावों का समर्थन व अभिव्यक्ति तन-मन उत्सव में स्पंदित आपार खुशहाली की रात्री रात्री मन के अन्धकार करे सकारात्मकता की रात्री।
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