अस्तित्व
जब-जब अस्तित्व पर है बात, तब-तब करना है उसपे मात. लेकर मन में हौसला , सांसों में सपना, हर मोह त्याग चले समर्पित दिन-रात ! इतना तपेंगे जितना सोचा ना था , अब तो लावा होगा, या राख होगा ! मंजूर नहीं अफ़सोस में जलकर ख़ाक होना , चलेगा लक्ष्य की राह में तपकर लुप्त होजाना ! फोड़ेंगे पाषाण निर्धारो से वो चट्टान मंज़िल, पिघलायेंगे तप्त मन से वो फौलादी मंज़िल! चीर देंगे हवा को भी विचारों की बाणों से, डिगा देंगे इच्छाशक्ति से वो अडिग मंज़िल!! करेंगे समर्पित हर एक दिल की धड़कन उसे, समर्पित हर एक साँस का लेना उसे, हर एक उठता स्पंदन समर्पित उसे, हर एक जागता संकल्प समर्पित उसे, शरीर का कण-कण समर्पित उसे, जीवन का क्षण-क्षण समर्पित उसे, मेरे अस्तित्व का सम्पूर्ण समर्पण उसे .....!! By SHIV(26.07.2025)
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