उठो भारत की शेरनियों, मैं तुझे
उठो भारत की शेरनियों, मैं तुझे जगाने आई हूं, तेरे हौंसले की आवाज़, अब मैं सुनाने आई हूं। सदियों से सोई हुई, तेरी शक्ति को मैं जगाऊंगी, तू अब उठ, अपने सपनों को पूरा करने की राह दिखाऊंगी। तेरी चुप्प, तेरी खामोशी अब आवाज़ बनेगी, तेरी ताकत से हर दीवार टूटेगी, हर बन्धन छूटेगा। तू है नारी, तेरा जन्म ही अद्वितीय है, तेरी हर एक मुस्कान, तेरे भीतर की शक्ति को परखती है। तेरी हिम्मत, तेरी मेहनत अब रंग लाएगी, अब हर अंधेरा तेरे उजाले से सवेरा होगा। तू हर जंजीर को तोड़ने के लिए तैयार है, अब अपनी शक्ति से हर मुश्किल को पार करेगी। तेरे संघर्ष में वो जोश है, जो पर्वत हिला दे, तेरी आँखों में वो नज़र है, जो हर कठिनाई को हरा दे। तू उठ, अपनी आवाज़ को बुलंद कर, ko अब तेरा समय है, अपने हक को प्राप्त कर। तेरी क़ीमत को अब हर किसी को समझना होगा, तू है शक्ति, तू है प्रेरणा, यह सबको देखना होगा। उठो, जागो, अब समय है बदलाव का, भारत की शेरनियों, तुम्हें ही चाहिए यह मुक़ाबला।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
