गदहों का सम्मेलन
बैशाख के महीना में होना,तय हुआ गधों का सम्मेलन; स्थान चुना गया कश्मीर में,नदी किनारे रमणीक झेलम। आयोजक बताया गदहों को ,वहां है बहुत घनी हरी दूब; जितना मन सब चरना,जब तक जाना न एकदम ऊब। एक गधा देखने में जो लग रहा था,मानो कोई मोटा गेंडा; ढेंचू ढेंचू कर पूछा आयोजक से,मीटिंग का क्या एजेंडा। आयोजक बोला-बहुत मुद्दों पर वहां होगा विचार विमर्श ; अत्याचार को रोकने के लिए,कैसे करना है हमें संघर्ष। बताया जाएगा गदहों को,कैसे अपना अधिकार है पाना; कैसे हमें, अत्याचारी मालिक को होगा सबक सिखाना। बताया जाएगा,अपनी सुरक्षा हेतु कैसे चलाएंगे दुलत्ती; इंसानियत,सीधापन त्याग, कैसे करना है अपनी उन्नति। नाम परिवर्तन पर भी ,चर्चा व रायशुमारी होगी सभा में; मूर्खता,गुलामी और लाचारी छिपी है,इस शब्द गदहा में। ये गदहा नाम बदल कर ,अब बैशाखनन्दन नाम रखेंगे; अब बहुत सह लिया गधा नाम,अब नहीं बदनाम सहेंगे। एक संरक्षक हम मानव से चुनेंगे, जिसमें नहीं हो ब्रेन; हम पर अत्याचार की बात उठाएगा,जा कनाडा,ब्रिटेन। नरेंद्र सिंह 20.09.2023
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