नीलकंठ
प्रेम के नाम से ही जब कलेश रह जाए पीड़ा और द्वेष ही जब शेष रह जाए थाम लो हथेली को करके सारा विष वमन इससे पहले कहीं मौन अवशेष रह जाए @अभिलाष
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