ना खाश ना बदमाश
बड़े ओहदों पे बैठने वाले कुछ लोग अक्सर, संस्थानों को अपनी जागीर समझ लेते है। जो अगर ना खास है या फिर ना ही है बदमाश, तो लोग उन्हें बंधुआ मजदूर समझ लेते है।।
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