दिल की आख़िरी दास्तान
एक रात एक बात लिखूंगा... सारी दुनिया रो सके, मैं कुछ ऐसा ख़ास लिखूंगा... खुद को बेकार, तुझे साफ़ लिखूंगा... हक़ीक़त में तो हम साथ न हो पाए... पर मैं तुझे अपना ख्वाबों का एहसास लिखूंगा... हर दर्द की बात लिखूंगा... दिल रो रहा होगा, पर हँसते-हँसते मैं अपनी बात लिखूंगा... आँखों में आँसू होंगे, पर एक मुस्कान का साथ लिखूंगा... मैं आज एक किताब लिखूंगा... किताब में अपनी और तेरी मुलाक़ात लिखूंगा... मैं उस किताब में अपना अधूरा प्यार लिखूंगा... रो सकेगी यह दुनिया, आज कुछ ऐसा लिखूंगा... याद करेगी यह दुनिया हमें... जब मैं खुद को मरता हुआ और तुझको खुश लिखूंगा... आज मैं एक किताब लिखूंगा...
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