सीता
सीता का परिचय केवल एक महिला का नहीं था सीता एक राज्य में रानी के दायित्व में थी राजा की पत्नि होना उस रानी के पद की अर्हता थी रानी की कुछ मर्यादायें होती थीं, जवाबदेही थी । उस पर कुछ लांक्षण लगे उसने अपना बचाव नहीं किया कठिन जांच प्रक्रिया से गुजरी फिर जाकर वो रानी बन पायी। जनता में फिर भी कहीं असंतुष्टि थी राजा मर्यादापुरुषोत्तम था ये नहीं देखा कि रानी उसकी पत्नि व हृदयांगी भी है उसने सीता को रानी के पद से पदच्युत कर दिया । पदच्युत रानी को देश निकाला किया गया जनता का विश्वास बढ़ाया गया पर सीता ने तो कभी कहीं शिकायत नहीं की आरोप सच हो या झूठ उसने प्रक्रिया पालन किया। समाज हित में स्व अर्पण करना होता है जब हम दायित्व में होते हैं तो अपना कुछ नहीं होता है महामूर्ख हैं वो जो सीता को नारी उत्पीड़न से जोड़ते हैं सीता कामकाजी महिलाओं की आदर्श थी और उसके आदर्श थे मर्यादापुरुषोत्तम।
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