झूठा रावण सा जल जाता है
तुममें रावण की रावणता में सीता सी नारी पर देख तकाज़ा हालातों का पग दर पग दिखता है तू मुझपे भारी तू रावण सा स्वांग रचे झूठ के सर में मक्कारी की मांग भरे और में सीता सी सकुचाऊ उत्कँठित और ब्यथित हो जाऊं मेघनाद सा गरजे तरजे तू अट्टाहास करे फिर फिर मारुं तेरी चंचलता को पर तू रावण के शीश सा फिर फिर उगे पर देख पलट के इतिहासों के रुझानों को कितना भी लाये पापी सच्चे ह्रदयों में नफरत के तूफानों को आखिर जीत हमेशा सच जाता है झूठा रावण सा जल जाता है झूठा रावण सा जल जाता है! (अपराजिता )
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