तेरे नाम
हल्का करके वजन मेरे बचपन, मेरी नादानियों, और मेरी खुशियों का; एक सौदा तुमने कर लिया। बदले में अकेलापन , दुख और जिम्मेदारियां से झोला भर दिया। मैं पगली थी हंसते-हंसते बस तुम्हारी हो गई, भूल गई ठहाके लगाना और वह तितलियों सा मंडराना। अब होती है घुटन इस पिंजरे में , लगता है जैसे पंखों को मेरे काट दिया। लोग मांगते हैं लंबी उम्र, मैं हर पल राह देखती हूं उस अंतिम घड़ी का जब होगी मुक्ति इस जीवन से जिसे निराशा ने घेर लिया।
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