हर शाम तुम्हारी याद ......
आंखों पर पलके बोझिल होने पर दूर गगन सूरज धूमिल होने पर दिनभर गर्मी से तपे तन में ठंडी ठंडी पुरूवा लगने के बाद अक्सर आ ही जाती है हर शाम तुम्हारी याद .......... गगन में चांद निकलने से पहले पूजाघर का दीप जलने से पहले मन को शांत एकान्त करके शाम की पूजा गायत्री के बाद अक्सर आ ही जाती है हर शाम तुम्हारी याद .......... #धीरेंद्र
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