दिल छू गया
कुछ तो खास था उनके उन शब्दों की तासीर में उनका हर लफ़्ज़ उतरता गया दिल की तस्वीरो में क्योंकि वह श्रृंगार में बस माथे पर एक बिंदी लगाती थी और जब सर पर जो पल्लू डालती थी हाय !उनका यूं सजना संवरना दिल छू गया । उन हिरनी सी आँखों पर वह जब काजल लगती थी और उन होंठों जो लिपिस्टिक लगाती हैं हाय! क्या गज़ब लगती हैं और जब उन्हें हमको अपने पास बुलाना होता तो. वह अपनी उन नाजुक पलकों को झुकाती थी हाय ! उनका यूं हमें पास बुलाना दिल छू गया पहली मुलाकात में उन्होंने अपनी उन आंखों से इस दिल को निशाना बनाया और दुसरी नजर में उन्होंने इस प्रेमी को अपना बनाया ओर जब जानेमन हंसती थी तो उनका गालों का ओ डिंपल हाय! उनका यूं हंसना दिल छू गया ✨सुधीर मैठाणी 🎀
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
