वीर छत्रपति
“सूर्य जस तेज आंखों में चिंगारी भरे, रणधीर वो ,महावीर वो, मां भवानी का भक्त वो, शत्रु का ख़ौफ़ है, न्याय का प्रतिक वो, स्वराज की ज्वाला धरे सनातन को शीश लिए हवा से तीव्र तलवार चले जैसे लहरे गगन में ध्वज केसरी है मृत्यु तांडव करती ऐसे गर्जत वो रण में है शीश झुकाए नमन करूं मैं ऐसे वीर प्रतापी को, वीर छत्रपति शिवाजी को…”
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