बारिश
ये चमकती हुई बिजली , पानी से भरे बादलों की गर्जन, कुछ भुलाने की कोशिश या, पुरानी मीठी यादों का कर रहे है सृजन। ठंडी ठंडी बौछार, छत से टपकता पानी, मन में घूम रही कुछ यादें पुरानी। पहाड़ों से गुजरने वाली ये ठंडी ठंडी हवा, दिल पे लगे जख्मों की बस यही है ये दवा। चमकती बिजली सा चमकता वो चेहरा, चांद पर काले बदलो जैसे चेहरे पे काले बालों का पहरा। बारिश की मंद मंद खुशबू सी वो मीठी सी मुस्कान, बादलो से घिरे नीलाभ की वो प्यारी सी शाम। निरंतर बहने वाली टंडी हवा सी वो, उसी हवा के झोंके में, बिन पानी के बादल सा उड़ता मैं।
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